बस्‍तर प्रहरी में आपका स्‍वागत है.

सोमवार, 18 सितंबर 2017

बस्तर के लगातार बदतर हो रहे हालात : पालनार में यौन प्रताड़ना से पीड़ित छात्रा ने किया आत्महत्या का प्रयास तो बुरकापाल गांव खाली करने का फरमान...




बस्तर:- बस्तर में आदिवासियों की स्थिति लगातार बदतर होती जा रही है । एक ओर स्कूली छात्राओं को रक्षाबंधन त्यौहार जबर्दस्ती मनवाकर यौन प्रताड़ना झेलना पड़ रहा है तो दूसरी ओर बुरकापाल के आदिवासियों को उन्हें अपने गांव से ही बेदखल करने का फरमान जारी कर दिया गया है ।  बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के जाँच दल ने अपने तीन दिवसीय दौरे के बाद यह निष्कर्ष निकाला है । उल्लेखनीय है कि विगत 31 जुलाई 2017 को दंतेवाड़ा जिले के पालनार स्थित कन्या छात्रावास में आदिवासी छात्राओं को जबरदस्ती गैर-आदिवासी त्यौहार रक्षाबंधन सीआरपीएफ के जवानों के साथ एक सप्ताह पूर्व मनाने विवश किया गया था । इसी दौरान उसी दिन सीआरपीएफ के जवानों द्वारा 17 छात्राओं के साथ छेड़छाड़ और यौन उत्पीड़न के प्रयास का मामला सामने आया । पीड़ित लड़कियों ने अपने माता-पिता से शिकायत की, लेकिन पूरे मामले को दबाने का प्रयास किया गया । इस बीच आप नेत्री एवम बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति की संयोजक सदस्य सोनी सोरी को इस घटना की जानकारी मिली और उन्होंने मीडिया के माध्यम से आमजन की जानकारी में इस शर्मनाक वारदात का भंडाफोड़ किया गया । 7 अगस्त को एफआईआर दर्ज होने के बाद सिर्फ दो जवानों को अब तक गिरफ्तार किया गया । इस मामले में अनेक अभियुक्त है जिनपर कोई कार्रवाई नही हुई है ।
5 दिनों पूर्व ही पीड़ित छात्राओं ने सोनी सोरी से सम्पर्क किया और बताया कि छात्रवास अधीक्षिका द्वारा पीड़ित छात्राओं को प्रताड़ित किया जा रहा है । बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति ने इस मामले की सच्चाई जानने का फैसला किया । 16 सितम्बर को एक जाँच टीम पूर्व केंद्रीय मंत्री अरविन्द नेताम के नेतृत्व में पालनार पहुंची जिसमे दंतेवाड़ा से सोनी सोरी, लिंगाराम कोडोपी, बिलासपुर से पीयूसीएल के राज्य सचिव डॉ लाखन सिंह, सराईपाली से पूर्व सीजीएम प्रभाकर  ग्वाल, प्रमुख आदिवासी नेता सुकुल नाग ,आम आदमी पार्टी रायपुर से डॉ संकेत ठाकुर, दुर्गा झा; बिलासपुर से भानुप्रकाश चन्द्रा एवम प्रतिभा ग्वाल शामिल थे ।
पालनार में पीड़ित छात्राओं, उनके माता-पिता, 11 ग्राम पंचायतों के सरपंच एवम जनपद सदस्यों की उपस्थिति में बैठक हुई । सभी के सामने पीड़ित छात्राओं ने अपनी पहचान छिपाते हुए उनके साथ छात्रावास अधीक्षिका पालनार द्रौपदी सिन्हा द्वारा उन्हें प्रताड़ित करने, गंदे शब्दों, अभद्र भाषा का इस्तेमाल करने यहां तक कि बड़े भाई के साथ गलत सम्बन्ध रखने की बात कहने, भोजन नही देने आदि की शिकायत की । एक छात्रा ने प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने का प्रयास होस्टल के बाथरूम में करने का किया, जिसे उसकी सहेलियों ने देखा, बचाया और माता-पिता तक सूचना दी ।पीड़ित छात्राओं की पीड़ा सुनकर सभी प्रतिनिधि दंग रह गए । यह बात जानकारी में लायी गयी कि इतनी बड़ी घटना होने के बावजूद सरकार ने अधीक्षिका के खिलाफ कोई कार्रवाई नही की है ।उसी दिन ही प्रतिनिधि मंडल ने कलेक्टर दंतेवाड़ा से मिलने का प्रयास किया लेकिन उनसे मुलाकात 17 सितम्बर को हो पाई । कलेक्टर से बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति ने अधीक्षिका के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की । इस पर कलेक्टर सौरभ कुमार ने मामले की जाँच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया ।



17 सितम्बर को जाँच दल दंतेवाड़ा से बुरकापाल रवाना हुआ लेकिन दोरनापाल में ही सुचना मिली कि आदिवासी महिलायें गांव छोड़कर दोरनापाल आ गईं है । इन महिलाओं ने जांचदल को बताया कि 25 अप्रैल को सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादी हमले के बाद उनका बुरकापाल रहना सम्भव नही रह गया है । गांव के 37 पुरुषों को जिनमे पीड़ित महिलाओं के पति शामिल है, को नक्सल वारदात में शामिल होने का आरोप लगाकर जेल में बन्द कर दिया गया है । सीआरपीएफ और पुलिस की दहशत की वजह से अधिकांश पुरुष गांव छोड़कर बाहर निकल गए है । गांव में रह रही महिलाओं को सुरक्षाबल तरह तरह से प्रताड़ित करते है और धमकाते है कि गांव छोड़कर चले जाओं नहीं तो मार डाला जायेगा ।
बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के सदस्यों की मुलाकात दोरनापाल में लगभग 35 पीड़ित महिलाओं से मुलाकात हुई । सभी के चेहरे में भयंकर दहशत के भाव दिखाई दिए । वे अब गांव लौटने से घबरा रही है, पुरुष जेल में बंद है, अब वे जायें तो जाएँ कहाँ ?
आसपास के युवकों ने बताया कि गत सप्ताह ही 4 पुरुषों को पुलिस द्वारा बुरकापाल से हेलीकॉप्टर से उठाकर ले जाया गया । लेकिन वे कहां रखे गये है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है ।पालनार और बुरकापाल के पीड़ित आदिवासी अपने नारकीय जीवन से मुक्ति की चाहत का बयान मुख्यमंत्री और राज्यपाल से करना चाहते है । जांचदल के मुखिया अरविन्द नेताम, सोनी सोरी, प्रभाकर ग्वाल,डॉ संकेत ठाकुर, डॉ लाखन सिंह, भानु चन्द्रा, दुर्गा झा ने  आदिवासियों को हर सम्भव न्याय दिलवाने हेतु संकल्प व्यक्त किया ।



अब तक 1 माह में बिना केस के थाने में बंद कियेगये आदिवासी



37 बुर्कापाल, 7 ताड़मेटला, 3 तोकनपल्ली, 1 दुलेर, 9 मीनपा, 18 कारिगुण्डम, 2 कोट्टापल्ली, 5 गोगुंडा, 5  परिया



खबर
बस्तर बचाओ संयुक्त संघर्ष समिति के जाँच दल के आधार पर


बुधवार, 13 सितंबर 2017

पांचवी अनुसूची की बात नही करने वाले, समाज विरोधी भूमिका निभाने वाले जनप्रतिनिधियों का किया जायेंगा राजनैतिक बहिष्कार...


समाज ने कहा जो  जनप्रतिनिधि 5 वीं अनुसूची की बात नहीं करेगा, उनके अनुपालन के लिए काम नहीं करेगा उनके पूर्णतः बहिष्कार करने की दी चेतावनी
5वीं अनुसूची  का अनुपालन, अवैध घुसपैठियों को बस्तर से भगाने का सवाल वह ससंद में उठायेगे या नहीं और कई प्रश्न  पर प्रतिनिधि पसीने पोंछते नजर आए.


बस्तर आदिवासी के संवेधानिक  अधिकारों के हनन, पांचवी अनुसूची का पालन, आत्याचार शोषण पर चुप्पी को लेकर भाजपा-कांग्रेस के सांसद, विधयाको को आदिवासी समाज ने  सख्त  रुख अपनाया, सारे आदिवासी नेताओ को समाज ने दो टूक में कहा की आदिवासियों के संविधान में निहित अधिकारों  के उल्घंन पर तमाम चुने आदिवासी प्रतिनिधि मुंह में ताला लागए बैठे रहते है, जानकारी हो बस्तर में लगातर आदिवासियों पर नक्सल उन्मूलन के नाम जुल्म ढहते आया है जिस पर तमाम जनप्रतिनिधि अपनी चुप्पी साथे बैठे थे आदिवासी जनप्रतिनिधियों के इस रवैये  से समाज में काफी आक्रोश व्यापात है , खबर है कि समय रहते अगर जनप्रतिनिधियों के व्यवहार में सुधार नही आया तो तमाम पार्टी चाहे भाजपा हो या कांग्रेस के हो समाज राजनैतिक बहिष्कार करने का मुड बना चुकी है, यही नही समाज उनको काला झंडा दिखा कर मंच भी प्रदान नही करेगी .

खबर है कि समाज के निर्णय के विपरीत जाने और समाज के मुद्दों से दूरी बनाने वाले आदिवासी विधायक, सांसदों को पत्र जारी कर समाज द्वारा बुलाया गया था जिसमें सिर्फ क्षेत्रीय सांसद विक्रम उसेंडी, क्षेत्रीय विधायक शंकर  ध्रुवा जिला पंचायत अध्यक्ष ही पहुचे थे  अंतागढ़ विधायक भोजराज नाग बैठक में नही पहुचे बैठक सफल रही , बैठक खरा और कड़क मंथन हुआ और राजनीतिक प्रतिनिधियों को उपस्थित सभी पदाधिकारी सहित उपस्थित सर्व आदिवासी समाज जनसमूह ने दो टूक खरी खरी कह दिया। खबर है कि समाज और समाज के मुद्दों की समाज को प्राप्त राजनीतिक आरक्षण से निर्वाचित होकर अनदेखी अब बिल्कुल बर्दाश नहीं की जायेगी और उन्होने आश्वाशन  दिया है कि दुबारा ऐसा नहीं होगा सांसद-विधायक और जनप्रतिनिधियों ने कहा कि समाज को विश्वास  में लेकर कार्य किया जायेगा हालांकि 5वीं अनुसूची  का अनुपालन, अवैध घुसपैठियों को बस्तर से भगाने का सवाल वह ससंद में उठायेगे या नहीं और कई प्रश्न  पर प्रतिनिधि पसीने पोंछते नजर आए.
विदित हो कि सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग द्वारा 6 सितंबर को बस्तर संभाग बंद की समीक्षा बैठक दिनांक 10 सितंबर को गोंडवाना भवन,भीरावही कांकेर में रखी गई थी सर्व आदिवासी समाज बस्तर जिला के अध्यक्ष प्रकाश  ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि पालनार घटना, अवैध घुसपैठीयों,नगरनार प्लांट की विनेविषीकरण एवं अनुसूचित क्षेत्र में पारम्परिक ग्रामसभाओं की प्रस्ताव का पालन प्रमुख मांग हैं को लेकर दिनांक 10 सितंबर को गोंडवाना भवन,भीरावही कांकेर में हुई मैराथन समीक्षा बैठक के बडे़ मायने हैं। सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों के पदाधिकारी, युवा प्रभाग , संगठन के प्रदेश पदाधिकारी और बड़ी संख्या में प्रबु़द्ध सगा समाज उपस्थित हुए। बैठक में बंद की सभी जिलों की विस्तृत समीक्षा की गई अनुसूचित क्षेत्र नगरी तहसील जिला धमतरी , मानपुर मोहला में भी बंद की जानकारी दी गई इस हेतु सर्व आदिवासी समाज बस्तर संभाग आभार व्यक्त करते हुए आगामी चरण के आंदोलन में भी सहयोग की अपील की गई।
जानकारी है कि द्वितीय चरण की संभागीय समीक्षा बैठक जगदलपुर में करना तय किया गया है जिसमे मध्य और दक्षिण बस्तर के सांसद, विधायको, मंत्रियों को बुलावा पत्र जारी कर बुलाया जायेगा, और समीक्षा बैठक कर उनकी संवैधानिक सामाजिक भूमिका सुनिश्चित  की जानी है। प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से बताया कि सर्व आदिवासी समाज के कुछ जिलों के पदाधिकारियों की समाज विरोधी गतिविधि करने वालों पर भी कड़ी कार्यवाही की जायेगी। सर्व आदिवासी समाज- बस्तर संभाग एवं प्रदेश  संगठन में अब समाज के मुद्दों पर आदिवासी जन प्रतिनिधियों के उदासीन रवैयें और दूरी केा लेकर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है, जो जनप्रतिनिधि 5 वीं अनुसूची की बात नहीं करेगा, उनके अनुपालन के लिए काम नहीं करेगा उनके पूर्णतः बहिष्कार के संकेत एक स्वर में सर्व आदिवासी समाज संभागीय एवं प्रदेष संगठन और संभाग भर से पंहुचे  सगाजनों ने दिये और सभी आदिवासी समाज सगाजनों से गाँव-गाँव छोर-छोर इस बाबत तैयार रहने अपील की है.
राम विचार  नेताम का सामाजिक कार्यक्रम में किया जाएगा बहिष्कार, समाज ने किया निंदा प्रस्ताव
राम विचार नेताम के लिए चित्र परिणाम सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष प्रकाश ठाकुर ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि राम विचार नेताम का यह बयान कि बंग समुदाय हमारे भाई बंधु हैं, इनको बस्तर से बाहर करने वालों पर कड़ाई से कार्यवाही की जायेगी पर समाज ने तिखी विरोध प्रतिक्रिया कड़ी निंदा की और उनकी असंवैधानिक रवैयों को आडे़ हाथों लिया गया है ।समाज राम विचार नेताम को यह संवैधानिक आदेष देती है कि बंग समुदाय उनके भाई बंधु है तो अनुसूचित क्षेत्र बस्तर संभाग में असंवैधानिक रुप से रहे बंगालियों को उनके गृह जिला रामानुजगंज में ले जाकर बसायें यदि नहीं बसायेंगे  तो इस बयान की औचित्य समाज को अवगत कराये। आगामी दिनों में रामविचार नेताम का बस्तर संभाग के किसी भी प्रकार की सामाजिक कार्यक्रम और मंच प्रदान नहीं किया जायेगा साथ ही अनुसूचित क्षेत्र बस्तर में प्रवेश करने पर आदिवासी समुदाय काला झंडा दिखाकर विरोध किया जायेगा। बैठक में राम विचार नेताम विधायक भोज राज नाग द्वारा संविधान समाज विरोधी बयान काम करने का निंदा प्रस्ताव पारित किया गया। ऐसे समाज विरोधी सोनू मांझी की भूमिका निभाने वाले समाज कंटको को समाज से दूर रखने की बात सगाजनो ने कही है सर्व आदिवासी समाज ने आगामी आर्थिक नाकेबंदी और आंदोलन इत्यादि कार्यक्रमों में  आदिवासी राजनैतिक नेताओं की उपस्थिति पूरे संभाग भर के सामाजिक प्रतिनिधियों ने अनिवार्य कहा है। यदि नहीं आते हैं तो राजनैतिक बहिष्कार करने की बात कही गई है।
क्या कहा जनप्रतिनिधियों ने ...
“कांकेर जिला पंचायत अध्यक्ष सुभद्रा सलाम ने कहा कि में समाज की बदौलत यहा तक पहुंची हु, संविधान में निहित पांचवी अनुसूची का पालन अगर नही होता है तो में सडक की लड़ाई लडूंगी, समाज जो निर्णय लेगा में उसके साथ हु, बंग समुदाय के सवाल पर चुप्पी साथ लिया गया.”

“कांकेर विधायक शंकर धुर्वा ने कहा कि समाज जो निर्णय लेगा वो सर्वोपरी है, प्रशासन पांचवी अनुसूची का पालन कराने में पूरी तरह असमर्थ है, अगर पांचवी अनुसूची का पालन नही होता है तो सामाज जो लड़ाई लडेगा में उनके साथ हु, बंग समुदाय के शरणार्थीयों के सवाल पर शंकर धुर्वा ने कहा की हम संवेधानिक लड़ाई के साथ है,”

“कोंडागांव विधायक मोहन मरकाम ने कहा कि पुरे मामले में जब तक में अध्यन नही करूंगा कुछ नही कह सकता, हालांकि उन्होंने कहा कि पांचवी अनुसूची का क्रियान्वयन करने में सरकार और प्रशासन अक्षम है”